Friday, November 22, 2013

चुनाव चक्कलस

चुनाओ आयोग कि भूमिका उस मास्टर क़ी तरह हो गयी है जिसकी क्लास में शरारती बच्चे हो -------------
बच्चा - १- मास्टर जी इसने मुझे खुनी पंजा कहा मैं इसका खून पी जाउँगा। 
बच्चा -२------ जी मास्टर जी पहले इसने मुझे खुनी बंदा कहा था। 
आयोग- क्यों रे तूने खुनी पंजा क्यों कहा ? गलत बात अच्छे बच्चे ऐसा नहीं कहते . चलो बताओ क्यों क्यों कहा था ? दस दिन में जवाब दो .
बच्चा - अभी बताऊ क्या मास्टर जी ?
आयोग - नहीं दस दिनों के बाद।
बच्चा - मास्टर जी इसने मुझे दादी-------- नानी-------- कहा। ये गाली देता है। गन्दा बच्चा है। है न मास्टर जी ? इसे इतिहास भी नहीं आता हा हा हा हा
आयोग - गलत बात गली नहीं देते।
बच्चा - मास्टर जी इसने मुझॆ चाये बेचने वाला कहा।
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                                            ग़ज़ल 



दुनिया के रंजो- गम से तन- मन बचाये रखना ,
गर कुछ न बच सके तो बचपन बचाये रखना।

सूरज जलाये उपवन बादल बहाये आँसू ,
मुट्ठी में अपने थोडा सावन बचाये रखना। 

ये दौर ए सियासत है हाथो में सबके कालिख ,
मुश्किल बहुत है यारो दामन बचाये रखना।

बाँटा वतन को जिसने वो मन भी बाँटते है i
कितना कठिन है उनसे आंगन बचाये रखना।

एक फूल बचा लेना, काँटों में छुपा देना,
मुमकिन नहीं ' शशि ' जब मधुबन बचाये रखना।